वो नहीं आए…

पूनम की रात थी,
हम यूँ ही 

उनके इंतज़ार में सड़क पर चल रहे थे।

हमें अकेला देख 

चाँद हमारे साथ साथ चलने लगा। 

ख़ैर, रात ढलने लगी,

सवेरा होने लगा,

पर उनका 

दूर दूर तक कोई नमोनिशान न था।

हमें धीमे-धीमे चलते देख,

चाँद भी आगे बढ़ गया।

कुछ देर इतरा

तेज़ी से चलता रहा,

फिर, ये देख कि 

हम आगे बढ़े नहीं,

चाँद फिर वापिस हमारे साथ-साथ

चलने लगा। 

पर वो, 

नहीं, वो नहीं आए। 

G.

<Just wore it, sitting in a bus watching the moon ride with me, sometimes ahead, sometimes along

It was sharad poornima on 15 October, and the moon, oh! It is beyond beautifu>

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Why does he not understand?

मैंने क्या कुछ नहीं किया 

उसे भुला देने की लिए।

और ऐक वो है कि,

हक़्क़ीक़त समझना ही नहीं चाहता।

बार बार रास्ते में रोक पुकार लगा देता है,

कौन समझाये उसे, कि 

ये रास्ता अब और काटा नहीं जाता। 

कौन समझाये उसे, कि 

ये रास्ता अब और काटा नहीं जाता। 

In the midst of Bangalore posts, I am posting this. Just wrote it, hence thought of sharing it. 

Btw, that picture up there is painting I did for a friend as a marriage gift. Nothing fancy but I do enjoy painting silhouettes. Damn easy they are! 😁

Taking my determination to blog up higher by a notch by bring my Alexa rank to the next level via #MyFriendAlexa Campaign with Blogchatter. Hopefully we’ll soon be back to being in Bangalore!

Till then don’t forget to drink a lot of water people. 😀 

तुम कहाँ हो?

बिजली तो चमक रही है

पर तुम कहाँ हो?

हवा तो चल रही है

पर तुम कहाँ हो?

बूँदें बरस पड़ेंगी,

हवा का रूख बता रहा है।

हरे पत्ते धुल जाएँगे

शाख़ पे फूल भी खिल आएँगे

बादलों का रंग बता रहा है।

कुछ नहीं बताई पड़ता तो, वो है

तेरा आना

ना जाने किस गाँव जा बैठा है तू।

ना जाने किस पीर में जोग लगा बैठा है तू।

इस चकाचौंध में गुम,

ना जाने किस राह पे क़दम रख बैठा है तू।

ऐसा नहीं है कि,

आँखें तेरा रास्ता तकती रहती हैं

हाँ पर,

ज़हन में है बस तू ही तू

बस तू ही तू।

Sometimes you feel incomplete

I do feel incomplete.

Many times! 

At many places, 

and many hours.

I feel incomplete 

with strangers, with friends

When alone shopping for

fashion trends,

To be honest, I even feel incomplete

when I have no control over my,

compliance with trends!

When fashion dominates,

and conscience pretends.

I feel incomplete,

when the movies end.

When the hero sings,

and the girl intends.

I feel incomplete

when I hear that song,

Randy Rogers singing

‘Lonely too long’

I feel incomplete when,

When I cook alone.

when I am hungry, 

but the mood’s forlorn.

I felt incomplete,

while I read that book. 

Missed my station!

Had no one to blame,

but the book.

I felt incomplete when,

I had cut my mane

Deep within it felt like

I had changed my name.

I wanted to cry and shout 

for a while,

But didn’t 

Because Delhi had taught me 

how to fake a smile.

I have no clue 

why I’m writing it down

may be because

I’m happy with the ‘You’re incomplete’ crown.

छः साल हो गये|

 

घर मेरा दूर ऐक छोटे शहर में है, जहां
पहली मंज़िल पर अपने घर से निकल जब मैं
बाज़ार मे उतरती हूँ तो,
पूरा बाज़ार जान लेता है
बच्चा, छुट्टी पर आया है
पूरा मोहल्ला, पूछ लेता है
और कितनी बची है पढ़ाई ?
उन्हें तो याद ही नहीं, क़ि
घर से निकले हुए
छः साल हो गये|
पढ़ाई ख़त्म किए हुए
दो साल हो गए|
दफ़्तर भी जाते हुए
दो साल होने को हैं,
पर ये हैं कि मानते नहीं|
उस छोटे शहर मे रहने वाले लोग
जैसे ज्यूँ के त्यों हैं,
आगे बढ़ते ही नहीं |
पर, पिताजी कहते हैं
वक़्त बदल रहा है
सब बदल रहे हैं,
सबके साथ
हम भी बदल रहे हैं|
पर मुझे ये बदलाव फिर
दिखता क्यूँ नहीं?

इजाज़त

नामुमकिन है कि तुझे सिर्फ़ चाहत से जीता जाये

तुझे पाने के लिये तेरी इजाज़त की ज़रूरत पड़ेगी।